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Genre : Poetry
TARGET AUDIENCE: Teenagers, Adults
Pages : 166

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Zindagi Agar Gulzar Hoti

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“ज़िंदगी अगर गुलज़ार होती, तो पतझड़ क्यों होता मौसम क्यों बदलता, हर हवा बाहर क्यों ना होती…” “वो मेरे गीतों से सजती सवरती थी मेरे शेरो को तोफो में कबूल किया करती थी...” “एक बार नजर इधर कर दे, इस नाचीज़ की कदर कर दे लबों से छूले, इस शराब को जहर कर दे पिएंगे तो तेरे हाथों से, मरेंगे तो तेरे हाथों से कितनी हसीन बनके मौत आई,मजा आ गया…” जिंदगी और मोहब्बत को करीब से जानने वालों की शायरी एक महफिल है. इसी महफिल के रंगमंच पर खड़ा होकर आज मैं अपने कुछ गीत सुनाता हूं |इन गीतों के साथ साथ आपको मेरी धड़कन में भी सुनाई देगी. मेरी धड़कनों मेंआपको अपनी धड़कन भी मिलेगी, और मेरे लफ़्ज़ों में आपको अपने लफ्ज़ भी मिलेंगे. और जब आप और हम मिलेंगे तभी मेरी शायरी मुकम्मल होगी, वरना मैं भी अधूरा और मेरी शायरी भी | मेरे गीतों में जिंदगी और मोहब्बत के बीच एक रिश्ता मिलेगा क्योंकि जिंदगी तब समझ आई जब मोहब्बत हुई और मोहब्बत तब मिली जब जिंदगी मिली |


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Anuj

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