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Genre : Poetry
TARGET AUDIENCE: Teenagers, Adults
Pages : 100

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GULDASTA-E-SHABD

Book Blurb:

इसे किताब कहना ठीक नहीं होगा, न ही यह किसी तरीके की कोई कलेक्शन है; जैसा कि इसके नाम से ही ज़ाहिर है, ‘गुलदस्ता-ए-शब्द’, अल्फाजों या शब्दों का एक गुलदस्ता है, जो सानिया सैफ़ी इसे पढ़ने वालों को देना चाहती हैं | गुलदस्ता इसलिए, क्योंकि इसमें लिखा हर अल्फाज़ शायरा के दिल के बहुत करीब हैं | इस गुलदस्ते में जहाँ एक नज़्म भारत के बंटवारे का दर्द बयाँ करती हुई नज़र आती हैं, वहीँ पर इश्क़िया अंदाज़ में कुछ अल्फाज़, अपने महबूब की जुदाई या उसके मेल को शेरों के रूप में खुद को लिखा हुआ पाते है | ये दोनों ही विषय, शायरा के दिल के बहुत करीब हैं क्योंकि उनका मानना है की इंसान का ज़ेहेन बस इश्क़ करना जानता है लेकिन उसके आस-पास की यह दुनिया उसे बंटकर और बांटकर रहना सिखाती है | यही वजह है कि इसका नाम ‘गुलदस्ता-ए-शब्द’ जहाँ पर एक अल्फाज़ उर्दू का है और एक शब्द हिंदी का | इस ही वजह से इसकी सभी नज्में और सभी शेर हिन्दुस्तानी भाषा में है, जो कि अपने आप में ही इस देश की एकता और अमन का प्रतीक है | शायरा का मानना है कि इंसान बाहरी तौर पर जितनी तरक्की करता जा रहा है, वह अन्दर से उतना ही खाली होता जा रहा है | कहने को तो ‘मॉडर्न’ हो गया है, लेकिन जातिवाद जैसी चीज़ें आज भी उसे अन्दर से खोखला करती जा रही हैं | मॉडर्न होने के साथ-साथ इंसान आज के लाइफ-स्टाइल की वजह से बहुत सी ज़ेहेनी बीमारियों से भी घिरता जा रहा है | आप बहुत सी नज्मों में शायरा की इस सोच को शब्दों का रूप लेते हुए पाएंगे | ‘गुलदस्ता-ए-शब्द’ एक कोशिश है, शब्दों के गुलों की ख़ुशबू को आपकी रूह तक पहुँचाने की।


Sample Chapters:


Short Synopsis:


SANIA SAIFI

About the Author:

सानिया सैफ़ी का रिश्ता लेखन की कला से कब जुड़ गया इसके बारे में तो वह खुद नहीं जानतीं | हाँ, इतना ज़रूर याद है की एक दिन अनायास ही क़लम को उठा कर मन के भावों को पिरोने की एक कोशिश की थी, और ऐसी ही अनगिनत कोशिशों का सफ़ल परिणाम आज ‘गुलदस्ता-ए-शब्द’ के रूप में आपके सामने है | हाल ही में सानिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की है | पढ़ाई के साथ-साथ वह कॉलेज में तीन साल थिएटर सोसाइटी में रहीं, जहाँ रह कर पूरे विश्वविद्यालय में उन्हें लेखिका और अभिनेत्री के रूप में बहुत सराहना मिली | इस किताब में पब्लिश की हुई बहुत सी नज्में सानिया ने अपने कॉलेज के दिनों में ही लिखी थी | पूरे देश में ‘स्लैम-पोयेट्री’ युवाओं में बहुत प्रचलित है | और उन्ही युवा पोयट्स (शायरात) में सानिया का नाम बहुत प्रसिद्ध है | वे कहती है कि वे कविता या नज़्म को केवल सुनाती नहीं हैं, बल्कि उसे परफॉर्म करतीं हैं | जो भी उन्हें एक बार परफॉर्म करते हुए देख लेता है, सानिया उनके मन में अपनी छवि सदा के लिए बसा लेतीं हैं | उनकी यही बात उन्हें सभी शायरों से अलग बनाती है | इस सब का श्रेय वो अपनी थिएटर की ट्रेनिंग को ही देतीं हैं | वह चाहतीं हैं कि इस ही तरह कला के और भी रूप आपस में मिल कर एक नयी शैली बना पायें, जिसके लिए उन्होंने ‘होम ऑफ़ आर्ट’ नामक एक संस्था का आग़ाज़ किया है | ‘द फ्यूचर राइटर’ उपनाम से लिखने वाली इन युवा शायरा, कवयित्री, पोयट, अभिनेत्री व परफ़ॉर्मर की क़लम से निकले कुछ शब्द आपके सामने प्रस्तुत हैं |